बिना पाँव सारा जग डोळे
राजा; रंक सभी को भाता
जब आता तब खुशियाँ लाता
रूपया
2 दीन दुखियो को देखकर
तेरे मन में मै आती हूँ
और तुझमे सेवा का भाव जगती हूँ।
करुणा
३ बारह मेरे भाई
इनको आकार देने वाले
दो निर्माता ,तीसरा निर्माता
तेजी से चलता हूआ
बताओ इन सबसे
मिलकर मैं क्या बनी
घड़ी
४ छोटे से है मटकू दास
कपड़ा पहने सौ पचास
प्याज़
५ सुख दुःख की जीवन साथी
पग -पग साथ निभाती हूँ
क्षण भर मैं जुदा न होती
हां ,बड़ी ,छोटी बन जाती हूँ
परछाई
६ आग भरे गुरगुड़िया दास
पेट में जिनके पानी ,
पूंछ लगाकर उसकी मुंह में
उगले धुंआ रमजानी
हुक्का
७ लाल -लाल पट ,गोल -गोल
खाने का समय हाय हाय
मिर्च
८ एक पेड़ कश्मीरा ,
कुछ लौंग फरे
कुछ जीरा ,कुछ ककड़ी
कुछ खीरा
महुआ
९ चार खड़े, चार पेड़
बीच में तने बने .
पसरे हैं लम्बोदर लाला
लम्बी चादर ताने
चारपाई
१० पत्थर पर पत्थर पर
पत्थर पर पैसा
बिना पानी के घर बनावे
वह कारीगर कैसा।
मकड़ी


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